रूखी-सूखी पलकें पानी करते हैं,
शायर भी बातें रूमानी करते हैं ।
वो बोले जो भी कहना सच ही कहना
हम तो साहब झूठ बयानी करते हैं ।
अपनों से चिपके रहने की जिद उनकी,
बूढ़े, बच्चों सी नादानी करते हैं ।
उम्मीदों का बस्ता काँधे बाँध दिया,
अबके बच्चे कम शैतानी करते हैं ।
नाजुक लट सा रिश्ता जाने कब टूटे,
आप 'सलिल' क्यों खींचातानी करते हैं ।
शायर भी बातें रूमानी करते हैं ।
वो बोले जो भी कहना सच ही कहना
हम तो साहब झूठ बयानी करते हैं ।
अपनों से चिपके रहने की जिद उनकी,
बूढ़े, बच्चों सी नादानी करते हैं ।
उम्मीदों का बस्ता काँधे बाँध दिया,
अबके बच्चे कम शैतानी करते हैं ।
नाजुक लट सा रिश्ता जाने कब टूटे,
आप 'सलिल' क्यों खींचातानी करते हैं ।